सोमवार, 11 अप्रैल 2011

hanuman jayanti

 पोरानिक मान्यताओ के अनुसार श्रीराम व हनुमानजी का जन्म चैत्र मास के शुक्ले पक्ष में हुआ|भगवन श्रीराम चैत्र शुक्ले नवमी को व हनुमानजी पूर्णिमा को अवतरित हुए कहते है की सात महयोगियो अस्वथामा,रजा बलि, महर्षि व्यास, हनुमानजी, विभिसन, कृपाचार्य, व परशुराम की उम्रे का कोई अंत नहीं है अर्थार्त यह चिरायु है त्रिदव ने उन्हें कलियुग का अधिकारी बनाया है अर्थात कलियुग में हनुमानजी की पूजा आराधना करके अभिस्ट फल की प्राप्ति संभव है गोस्वामी तुलसीदास जी ने इन्ही की आराधना करके श्रीराम के दर्शन किये| हनुमानजी को देवताओ में सबसे सरल मन जाता है कहते है की इनकी पूजा जप ताप में कोई गलती भी हो जय तो वे शिग्र कुपित नहीं होते|वे एक ऐसे देवता है जिनकी बूढी व शक्ति का कोई अंत नहीं है आठ सिदियो व नव रिधियो के वे स्वामी है नवग्रह खासकर शनि, मंगल, सूर्य, राहूव केतु से ट्रस्ट यक्ति इनकी पूजा करके शुभ फल प्राप्त कर सकता है| बाल्यावस्था से लाकर आज तक हनुमानजी तरह तरह की लीलाए करते रहे है|चाहे अवतारी पुरुष हो.नवग्रह हो या मनुष्य हनुमानजी सबकी मदद करते रहे है चाहे राम सुग्रीव की मित्रता हो या सीता की खोज हो,मेग्नाथ के नागपाश से राम लक्ष्मण की मुक्ति हो, सभी कठिनाएयो में हमेशा हनुमानजी ही संकटमोचक सिद्ध हुए द्वापर युग में भी हनुमानजी ने अर्जुन की बड़ी मदद की|

1 टिप्पणी: